माई के ममता
तिजहरियवाँ छाँटी काटत रहनी तवलेकहीं माई घर में से हाँक लगावत निकललि , " ए मझिलू! ए मझिलू! काहाँ बाड़ S हो ? अरे तनि लवना-ओवना के इंतिजाम क देत S । दिन डूबे जाता।" हम माई के बोलावल सुनि के छँटिकट्टा में से बाहर निकलनी अउरी कहनी , " माई ते काँहे चिंता कइले बाड़े। हम दुपहरिएवे में लग्गी ले के बड़की बारी में गइल रहनी हँ अउर तीन बोझा लवना तुड़ि के ले अइनी हँ। अउरी हाँ! उ लवना हम भुसउला घर में ध देले बानी।" हमार इ बाति सुनि के माई कहलसि , " अच्छा! ठीक कइल S ह S । हाँ , तनि बिहने एगो अउरी काम क S दिह S, केहू के बोलवाके खोंप छवा दिह S ।" हम कहनी , " ठीक बा , बिहने खोपवों छवा देइबि अउर तें कई दिन से देहरी में से गोहूँ निकालि के घाम देखावे के कहतारे , उ हो क देइबि।" हमरी एतना कहते , माई कहलसि , " अरे! हँ , गोहूँ के घाम देखावल त बहुते जरूरी बा काँहे की उ घुनाइल सुरु हो गइल बा।" हमार अउरी माई के इ बाति चलते रहे तवलेकहिं उहवाँ घनेसर भाई साइकिल पर कइगो झोरा लटकवले आ गइने। ओ झोरन में से ऊ एगो झोरा उतारि के माई की ओर बढ़वने अउरी कहने , " ल S...