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अवतारी पुरुस

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छोट रहनी हँ S त S कई बेर केहू-केहू कहि देत रहल ह S की ए बाबू अवतारी हउअ S का ? एकदिन रहाइल ना अउरी हम पूरा गाँव-गिराँव , हित-नात सबके बोलवनि अउरी कहनी की रउआँ सभे जानल चाहत बानी न की हम अवतारी हईं की का हईं. त S रउआँ सभे धेयान लगा के सुनि ली सभें की हम अवतारिए हईं. अउरी हम अपनी अवतार लेहले के कथा सुना दे तानी. रउओं सब सुनीं- ई बाति तब के ह S जब हम इंदरलोक में चापलूसी अउरी नेतागीरी विभाग के हेड रहनी. अगर ओ समय केहू के चापलूसी चाहें नेतागिरी सीखे के होखे त S ऊ हमसे संपर्क करे. अब त S रउआँ सब के बुझाइए गइल होई की नेतागिरी अउरी चमचागीरी की बल पर हम इन्नर भगवान की केतना करीब होखत होखबि. एकबेर के बाति ह S की हम इंदरासन में इन्नर भगवान की संघे बइठि के सुरा अउरी अधनंगी सुंदरियन की नाच अउरी गीति के आनंद लेत रहनी. रउआँ सब इहाँ सुरा के अरथ देसी अउरी ठर्रा न समझि के सोमरस अउरी सुंदरियन के मतलब अपसरा समझीं. हम सुरा-सुंदरियन में एतना लीन रहनी की भगवान के उहवाँ आइल हमरा पते ना चलल. भगवान की आवते नाच-गाना बंद हो गइल अउरी साथे-साथे रसपानो के मजा किरकिरा हो गइल. इ सब देखि के हम चिहा गइनीं की अरे...