इयादि आवता लरिकाई
बाबूजी के डाँटल अब बरदास्त से बाहर हो गइल रहे। हम माई से कहि
देहनी की बाबूजी के समझा दे, बाति-बाति पर घघोटें मति। अब हम लइका नइखीं।
कहीं एइसन मति होखे कि हमरियो मुँहे में से उलटा-सुलटा न निकलि जाव। ए पर माई हमके
समझावे अउर कहे की बाबू, तोहरे बाप न हउअन, तोहरी
अच्छे खातिर डाँटेने। अपनी बाप की बाति के केहु बुरा मानेला का। एकरी बाद हम माइयो
की बाति के अनसुना क के घर से बाहर चलि जाईं।
रोज साँझीखान माई से कुछ रुपया-पइसा लीं चाहें झोरा में दु-चार
किलो अनाजे ले लीं अउर साइकिल उठा के बाजारी की ओर निकल जाईं। बाजारी में इयारन
कुलि की साथे खूब चाह-पकउड़ी कटे अउर ओन्ने से पान चबात, थूकत, खिखिआत घरे चली आईं।
एन्ने बाबूजी अउर माई दिनभर घर में, खेत्ते
में काम करे लोग। सबेरे उठि के माई चउका-बरतन करे अउरी बाबूजी चउअन के सानी-पानी
अउर गोबर-गोहथारि करें। ओकरी बाद दुनु परानी कुछु रुख-सूख खा के हँसुआ, खुरपी, कुदारी उठावे लोग अउर खेत्ते की ओर निकल जाव
लोग। एन्ने हम दिन उगले ले खटिया तूड़ी अउर उठले की बाद बार-ओर छारि के मटरगस्ती
में लागि जाईं।
कुछ सालन की बाद हमार सादी-विआह हो गइल। दुगो लइकन के बाप हो गइनी।
एन्ने बाबूजी खटिया ध ले ले रहने अउर माई के खाँसी टोला-महल्ला की लोग के रातिभर
जगवले रहे। अब का करीं कमाए गइले की सिवा कवनो चारा ना रहे। आखिर उधार-बाकी से
कबले काम चलित।
एकदिन टरेन पकड़नी अउर मुंबई चलि अइनी। इहाँ आवते जब फुटपाथे पर
सुत्ते के परल अउर झाड़ा फिरे खातिर लाइन लगावे के परल त सब सेखी रफूचक्कर हो गइल।
एकदिन एगो भलमानुस की किरिपा से जब एगो खोलि में रहे के इंतजाम हो गइल तब जा के
जीव में जीव परल। ए खोली में हमरिए तरे दु जाने अउर पहिलहीं से डेरा डलले रहे लोग।
एकदिन सुतले रहनी तब्बे हमरी सथवावालन में से एगो हमरी चुतरे पर एक
लात बजवलसि अउर कहलसि की सरऊ, सुतले रहबS का? जो पानी भर। बुझाता अपनी बाप के घर बनवले बानेS। ओकरी एतना कहते हमार डेकार खुलि गइल अउर हम लगनी फूटि-फूटि के
रोवे। ओई दिन माई-बाबूजी के बहुत इयादि आइल। घरे जाए के सोंचि लेहनी तवलेकहीं अपनी
दुनु लइकन अउर मेहरी के चेहरा इयादि आ गइल अउर मन मारि के घरे जाए के पलान केंसिल
क देहनीं।
एन्ने-ओन्ने बहुत चक्कर लगवनी पर कहीं निमन काम ना मिलल। कहीं जाईं
त पढ़ाई-लिखाई पूछें कुलि अउर १० फेल बतवते डाँटि के भगा देंकुलि। जब हमके ऊ
डाँटेकुलि त हमरा उ दिन इयादि परे जब हमरा बाबूजी के डाँटल घोंघियाइल बुझाSअउर हम उनसे लड़े खातिर तइयार हो जाईं पर इहवाँ त हमके एगो अदना
आदमी ले दुरदुरा देव। अब हमार अकल ठेकाने आ गइल रहे अउर हम हारि-पाछि के बाचमैनी
सुरु क देहनी।
कुछ सालन की बाद कुछ कमइले-वमइले की बाद जब घरे गइनी त बाबूजी अउर
माइ के गोर पकड़ि के खूब रोवनी। अब हमरा आपन लइकाई अउर माई-बाप के दुलार मोन परे।
एकदिन माई कहलसि की बाबू जवन बीति गइल ओके भुला जा अउर अब अपनी लइकन के ठीक से
पढ़ावS-लिखावS अउरी
अपनी कंटरोल में राखS। हम कहनी की हँ रे माई, अब जवन
गलती हमसे हो गइल बा उ लइकन से ना होई अउर गँउवे में छोट-मोट रोजगार क के हम लगनी
अपनी लइकन के पढ़ावे अउर घर के खरचा चलावे।

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