लंठई


अरे खूब मोन परता। एक बेर गाँव की कुछ लुहेड़नकुल की साथे कमधेनवा गइनीं। दरअसल कमधेनवा नदी ओ पार बा अउर ओ गाँव की केतने जाने की घरे हमरी गाँव की केतने जाने से नेवता-हँकारी होला। अगर हमरी गाँवे सादी-विआह पड़ी तो ओ गाँव के लोग गोल बना के आई अउर ओहींगा ओ गाँवे कुछ परी त हमरी गाँव के लोग गोल बना के जाई।
साझी खान के समय रहे। हमरी साथे पट्टीदारी के कुछ अउर लोग रहे। लोग ना कहबि काहें की सब त लंठे रहने कुल, एक से बढ़ि के एक। 5-7 जाने रहनीं जाँ। कमधेनवा में जाए खातिर नदी पर एगो बाँस आदि से बनावल, सँकरा, हिचकोला मारेवाला पुल रहे। इ पुल खाली गर्मी की दिन में काम आवेला ना त बाकि दिन त नाइ से पार जाए के परेला। हमनी जान आपस में तय कइनी जाँ की तीरछे, पैदले दउरत-परात चलि चलल जाई अउर खा-पी के 10-11 बजे राति ले घरे आ जाइल जाई।
कमधेनवा पहुँचनी जाँ, खाना-ओना खा-ओ के जब चलनी जाँ त नदी पार क के ए बगल पुलवे की लगे खड़ा हो गइनीजाँ। भइल का की तवलेकहीं कवनो अउर गाँव (ओ गाँव के नाव ना लेइब, काहें की ओहु गाँव में हमार रिस्तेदारी ह....अउर ओ लोगन के पता चलि जाई कि ए लंठई में हमहुँ रहनी त हमरा खातिर ठीक ना होई।) के 4-5 लोग ओ पुल से नदी क्रास करे लागल। हमरी गउआँ वाला लंठवा, का कइने सन की पुलवा के पकड़ि के लगनेसन जोर-जोर से हिलावे। बाँसे के जोरि के बहुत पतरे पुल बनावल रहे...अब भइल इ की ओ पुल सवार कुल के अकिलिए हेरा गइल। ना ए ही पार आ पावेंसन ना ओ ही पार। अब उ लगनेसन हाँड़ फोड़ि-फोड़ि के गरिआवे....अउर एन्ने हमरी गाँव वाला तबले पुल हिलावल जारी रखनेसन तवलेक एगो मनई पानी में गिर ना गइल। उ बेचारा पानी में गिरते चिल्लाइल (गरिआ के) रहकुलि हम तोह कुल के लंठई देखावतानी। ओकरी बाद उ पानी में तैरत हमनी जान की ओर बढ़ल, राति के लगभग 11 बजत रहे....हमनीजान के गोर उठल अउर लंक लगा के भगनी जाँ।
पानी में से निकली के उ चिल्लाइल अउर तवलेकहीं ओकरी सथवो वाला नदी पार क लेले रहने सन, कुछ दूर ले त हमनीजान के दउरवने सन, ओकरी बाद बेचारा गरिआवत अपनी गाँव की ओर चलि देहने सन। अउर हमनी जान के जवन गोर उठि गइल रहे उ मटिरहिया गढ़ही पर आकर रूकल। हीहीयात, खिखियात हमनी जान गाँवे चलि अइनी जान। अब एतनो लंठई ठीक नइखे। बाद में पता चलल की उ हू लोग रिस्तेदारे रहे। सायद ओ में से एक जाने कवनो गाँव में कहले रहनें की रिस्तेदारी में के रहे लोग, भा कहीं के, अगर भेंटा गइल रहित लोग त टंगरिया चिरा गइल रहित। खैर, ए में उनहूं के कवनो दोस नइखे। कहल जाला की लंठइए में बखेंड़ा हो जाला। ए से बचले के ताक बा। जय-जय।



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