ससुरारी


नया कुर्ता- पियरी धोती, काँधे पर गमछा, गोर में चमड़उआ जूता अउर मुँह में पान चबात, पिच-पिच थूकत जब रमेसर काका चलने त खदेरूआ टोकलसि, "जा झारि के, रमेसर काका, जा झारि के।" खदेरूआ के बाति सुनि के रमेसर काका मन ही मन मुस्किअइनें अउर कहने, "का हो बेटा खेदारू, बड़ी चुटकी ले तारS।" एक पर खदेरूआ कहलसि, "चुटकी नइखीं लेत काका! आजु खूब झरले बाड़S, लागता कवनो नवका पहुनाई जा तारS?" रमेसर काका कहने, "हँ बुरबक, आजु समधिआने के चढ़ाई बा। कई बेर उहाँ से बोलाहट आइल ह पर काम में एतना अझुराइल रहनी हँ की मवके ना मिलत रहल हS। होत-जात, होत-जात आजु तइयारी होइए गइल।" इहे कहत अउरी धोती सरियावत रमेसर काका आगे बढ़ि गइने।
जब रमेसर काका आँखि की ओझल हो गइने त खदेरूआ उनकी दुआरे की ओर बढ़ल। खदेरूआ रमेसर काका की दुआरे पर पहुँचि के हाँक लगवलसि, "ए इयार, ए इयार! केहू बा हो घर में?" घर में से रमेसरी काकी मुड़ी पर दउरी धइले निकललि अउर कहली, "का बाबू! के के जोहतारS, तोहार काका त घरे नइखें, अबे पहुनाई गइने हँ।" एपर खदेरूआ कहलसि, "हँ, रास्ता में भेटाइल रहने हँ। बाति भइल हS। अच्छा तूँ काहाँ जातारू?" रमेसरी काकी कहली, "गोनसारी जा तानी। खिचड़ी नियरा गइल बा, भूजा-ऊजा भुजाई तबे न लाई-धोंधा बँधाई। एगो लइकिनी बिया ओहू के खिचड़ी भे जे के बा।" इ हे कहत रमेसरी काकी गोनसारी की ओर चलली। खदेरूआ दउड़ि के रमेसरी काकी की मुड़ी पर से दउरी ले के अपनी मुड़ी पर ध लेहलसि अउर कहलसि, "चलS काकी, हम तोहके गोनसारी पहुँचा दे तानी। दउरिया बहुत भारी बिया।"
चाउर से भरल दउरी ले के खदेरूआ आगे-आगे चलल अउर ओकरी पीछे-पीछे रमेसरी काकी हो लिहली। कुछ दूर चलले की बाद खदेरूआ फेरू टोकलसि, "ए काकी, अउरी इयार काहाँ बाने हो, 15-20 दिन से लउकत नइखन। कहीं कमाए-ओमाए चलि गइल बाने का? ओ हू मरदवा के कुछ बुझाला ना..काम-धंधा के दिन बा...सबके बवगा होता। एन्ने रमेसर काका अकेले परेसान बाने। खेतियो-बारी करे के बा अउरी गोबरो गोहथारी अउरी ए ही में पहुनाइयो। मरदवा के कमाहीं जाए के रहल ह त खेती-बारी करा के गइल रहतें। बुझाता की सरकारी नोकरी हS? 10-15 दिन बादे गइल रहतें त का बिगड़ि जाइत?" 
खदेरूआ के बाति सुनि के रमेसरी काकी 2-3 मिनट ले त चुप रहली ओकरी बाद एगो लंबा साँस ले के बोलली, "बाबू, तोहार इयार कमाए-धमाए नइखन गइल, उ त अपनी नइहरे गइल बाने।"
 "अपनी नइहर??" खदेरूआ फेर टोकलसि।"
 "नाहीं-नाहीं, हमरी कहले के मतलब बा की ससुरारी गइल बाने। दुनु जाने मरद-मेहरारू 15-20 दिन हो गइल एक साथे गइल लोग। उनकी ससुर के कई बेर निहोरा आइल की अकसेरुआ बानी, काम-धंधा के दिन बा त तनि बबुनिया आ जाई त हाथ बँटा दी। हमार मन त एकदम ना रहे भेजे के, इहवों त बहुत सारा काम बा। पर तोहार काका भेजवा देहनें।"
"अच्छा, त इयार भउजी के पहुँचावे गइने अउरी खुदहूँ उहवें रूकि गइने।" खदेरूआ थूक घोंटलसि।
रमेसरी काकी फेरू कहल सुरू कइली, "का कइल जा सकेला। आजु-कल की लइकन के ससुरारिए घर बा। महीना में 25 दिन ससुरारी में रहतानेसन त 2-4 दिन खातिर घरे देहिं देखावे खातिर आ जा तानेसन, जइसे की पहुनाई आइल होखेंसन। घरे रहले पर एक्कोगो काम नइखे घोंटात, दिनभर चउराहा अउरी बाजारी में घूमें के बा। बाप-माई घरे काम में परेसान बा पर ओने धेयान नइखे। ससुरारी में रहल जाता अउर ओही के आपन घर मानल जाता। अब बतावS, जब एतना कुलि कइल जाई त मेहरारू कपारे पर ना चढ़ि, ए में मेहरारू के कवन दोस बा? पहिले एक-आध आदमी घर-जमाई रहे ऊ हो मजबूरी बस पर आजु त बिआह होते सब केहू घरजमाई हो जाता।"
"अच्छा काकी, S एगो बाति बतावS, जब इयार ससुरारी गइलहीं बाने त रमेसर काका का करे उहवाँ गइने हँ?" खदेरूआ कहलसि।
"दरअसल बाबू, बाति इ बा की तोहार काका, तोहरी इयार के ले आवे गइने हँ..इहाँ से कईगो खबर भेजाइल ह पर तोहार इयार बिहने आइबि, परसो आइबि, इहे कही के टारि दे ताने। एन्ने सब काम फँसल बा।"
एतने में गोनसारी आ गइल, खदेरूआ अपनी मुड़ी पर से दउरी उतारि के उहवें ध देहलसि अउरी मन में सोंचत चलल,"सही बात बा, जबाना उल्टा हो गइल बा, पहिले लोग अपनी बेटी, पतोही के बोलावे जात रहल ह अउर अब अपनी लइका, भाई आदि के बोलावे जाता (ससुरारी से)।" 
"मरदा मनइया सीमा पर सोभे, मउगा मरद ससुरारी में.......।" इ हे गाना गुनगुनात ऊ अपनी खेत्ते की ओर चलि देहलसि। ओकरी मन में एगो अउरी बाति नाचत रहे उ इ की आजु की जबाना में दु गो रिस्तवे चलता....अब रऊवाँ बताईं कवन-कवन? ससुरारि अउर सढ़ुआन का?......पता ना। जय-जय

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