नजरिए में नजरिया बा


सनिचर अउर अतवार की दिने, दिन उगले ले खटिया तुड़े के आदति बा। आखिर सनिचर, अतवार छुट्टिए रहेला अउर केहू जगावहूँवाला चाहें घोंघिआएवाला नइखे ए से आदत खराब हो गइल बा। ओई दिन तनी सँवकेरे जागि गइल रहनि। काहें की मूड बनि गइल रहे की कपरा-ओपरा खुदे फिंचाई अउर लैपटापे पर कवनो फिलिम के देखाई होई। लगभग दिन के 10-11 बजत होई, तबलेकहीं मोबाइल बाज उठल। गर्लफ्रेंडे के फोन रहे। प्रीत के रीत जवन निभावे के रहे। दनाक से फोन उठा के काने से सटा लेहनीं, हम कुछ बोलीं ओकरी पहिलहीं काने में आवाज गूँजल। हम कुछु सुनल नइखीं चाहत। आजु किक देखे जाए के बा। फटाफट तइयार हो के आ जा अउर हमके लिया के चलS। एतना कहते फोन कट हो गइल। हमरी मन में लड्डू फूटे लागल। खुसी की मारे इ ना बुझा की का करीं। फटाफट हड़बड़इए में कपरा पहिननी, सीसा में देखि के तनी गाहि लेहनीं। क्रीम-स्रीम लभेरनी अउर कवनो मिलन के गीत गावत घड़ी बांधे लगनी। घरी बँधले की बाद आँखी पर चस्मा लगा के सीसा में एक बेर अउर निहार के मने-मन मुसकात बाइक के चाभी लेहनी अउर घर की दरवाजा पर ताला लगावे लगनी। ताला लगा के तेजी से बाइक की लगे पहुँचनी, अबहिन बाइक चालू करीं तवलेकहीं फेन से मोबाइल घनघना उठल। ए बेरी फोन उठा के बोले के मवका उनके ना देबे के रहे....ए से ताबड़तोड़ बोलल सुरु कइनीं, “ए बबुनी, काहें परेसान बाड़ूँ, 5-7 मिनट में तहरी लगहीं पहुँचतानी, तोहसे ढेर बेचैन हम बानी, हँ फरक एतने बा की तूँ किक देखे खातिर अउर हम तोहसे मिले खातिर।एकरी बाद हम काहे के उनकर बात सुनीं, फोन काट देहनी अउर बाइक चालू करे खातिर किक पर किक मारे लगनी। लगातार 4-5 मिनट किक मरले की बादो जब बाइक चालू ना भइल त तनि उदासी आ गइल, अउर मुँहे में से निककल काहें बिलेन बनतारू, ए बाइक महरानी। अरे इ का, चाभी त हमरी हथवे में रहे। अपनी मूर्खई पर हंसत, चाभी लगवनी अउर बाइक इस्टाट क के तेजी से घुर्र-घुर्र करत निकल गइनीं।
एक त बरसाते के दिन, रोडे पर जगहि-जगहि पानी लागल रहे। एक जगहि त रोड नीक खराब हो गइल रहे अउर उहाँ एगो मजूर अउर मजूरिन माटी-ओटी डालत रहनेसन। हमरी बाइक के इस्पीड कम क के हाँ से निकले लगनीं, तवलेकहीं एगो बचकानी आवाज कान में गूँजल। भइया, ओ भइया, सुनो ना.....पीछे मुड़ि के देखतानी त एगो छोट बच्ची आवाज सगावत हमरी ओर बढ़ रहल बिया। हमरा पूरा यकीन हो गइल की इ ए ही मजूर-मजूरनी के लइकी ह। अनचाहे हम रूक गइनी, हमरा लागल की सायद पइसा माँगी, मन ही मन सोचनी की पइसा का आजु केहू जान माँगी तब्बो दे देइबि। गर्लफ्रेंड के चेहरा जवन सामने आ गइल रहे। फेन एगो हलुक मुस्कान चेहरा पर फइल गइल। उ हमरी लगे पहुँचो, ओकरी पहिलहीं हम फटाफट आपन परस निकाल लेहनीं। हमरी लगे पहुँचते ओ लइकी एगो किताब हमरी ओर बढ़ा देहलसि अउर कहतिया, भइया....एक सवाल नहीं आ रहा है....हल कर दोगे क्याबापू ने कहा था कि अभी कोई इधर से गुजरेगा तो पूछ लेना।
हम बाइक किनारे खड़ा क देहनी एउर ओही पर बइठल-बइठल सवाल हल करे लगनी। एगो अजीब आनंद अनुभव होके लागल। सवाल हल करत-करत बीच-बीच में ओ लइकी के बाति हमके अंदर ले गुदगुदावे लागल। एतने में हमार मोबाइल फेर से घनघना उठल। जब फोन बार-बार घनघनाए लालग त एक बेर उठा के खाली बेमन से एतने बोलनीं की आवतानी न....अउर एतना कही के फोन स्वीच आप क देहनी।  
अब हम ओ छुटकी की साथे एगो पेड़े की नीचे जा के एगो बोरा पर बइठ गइनीं। उहवें ओ मजूर-मजूरनी के कुछ समानो धइल रहे अउर ए लइकी के एक-आधगो फाटल-फुटल किताब आदीष छुटकी बहुते नटखट रहे ओके पढ़वले में एगो अलगहीं आनंद मिले लागल। वइसे भी किताब छुवले 4-5 सालि हो गइल रहे अउर बचपन से ठीक से मिलल भी पता ना केतना सालि। हाथे में किताब ले के बहुते अच्छा लागत रहे। सवाल लगा देहनी अउर ओ लइकी से जीभरी के बात कइनीं.... बाते-बाते में कब एक घंटा निकल गइल, पते ना चलल...फिर इयाद आइल किक अउर आपन सजनिया। भगनी...खूब तेज। अबहिन ले, रोडे पर खरा होके उ हमार इंतजार करती रहे। काफी बिखीआइल भी रहे...ओकर चेहरा लाल हो गइल रहे। बिना ओकरी हजारन सवालन के जबाब देहले हम ओके खींचि के बाइक पर बइठा लेहनी अउर सिनेमाहाल की ओर ना जाके फेनु ओ ही बच्ची को ओर आपन बाइक मोड़ि देहनी। अबहिन जइसे ही ओ लइकी की लगे पहुँचतानी तवलेकहीं उ पेड़े की लग से उठि के फेनु दउड़त आइल अउर कहतिया, भइया...एगो सवाल अउर। बाइक पर से उतरते हम कहनी, तोहरे खातिर त हे मस्टराइन के ले आइल बानी। अब हम अउर हमार जानेमन एगो बोरा पर बइठि के धेयापक बनि गइनी जाँ...एगो अलगहीं आनंद, जवने के बखान सब्दन में ना हो सके।
अब त हमार प्रेयसी प्रतिदिन एक-आध घंटा किक देखेली...अब उनकरा ए ही किक में खूब आनंद आ रहल बा। अब उनकी नजरिए के नजरिया बदलि गइल बा। हमहूँ कबो-कबो समय निकालिए लेनी....सोंचतानी की फिलिम देखेनी...मनरंजन खातिर....300 रुपया टिकट....ए 300 में ओ लइकी खातिर एगो बैग आ जाई अउर मनरंजन की साथे-साथे आत्मसंतुस्टि भी...जीवन जीयले के मकसद भी...त का रउओं किक....अगर एइसन बात बा त बाइक मोड़ी, मनरंजन के तरीका भी। जय हिंद।

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