जो दिल खोजा आपना....
आजु जी बहुत उदास बा। ए उदासी के कारन हम खुदे बानी। हमरा इ लागत रहल ह की भारत में जवन भ्रस्टाचार व्याप्त बा , अंधकार व्याप्त बा , असांति व्याप्त बा , ओकर कारन खाली नेते अउर अधिकारी बाने। नेता , अधिकारी मिली के देस के बेंच रहल बाने। सारा दोस हम एही लोगन की मत्थे लगा के आपन पीछा छोड़ा लेत रहनी हँ। पर रातिखान जवन दिल अउर दिमाग में मंथन भउवे ओसे त हमरा इहे लगुवे की सबसे बड़हन दोसी त हमहीं बानी। हम झूठे दूसरे के दोस लगावतानी पर देस के , समाज के गइतलखाने में ले जाएवाला हमहीं कथित पढ़ल-लिखल , नासमझ इंसान बानी। हमरी एइसन चतुरबुरबकवा त केहू हइए नइके। बाह भाई बाह....बाह रे हम। अगर हम नइखीं लूट पावत त दूसर लूटेवालान के कोसत बानी , ओ लोगन पर इल्जाम लगावत बानी पर का हम दुध के धोवल बानी ? हम त विचार करते बानी आपो विचार करीं। हमरा त अब इ पूरा तरे से विस्वास हो गइल बा की भस्टाचार में खाली नेते , अधिकारी लिप्त नइखें , अरे भाई ए में बढ़ि-चढ़ि के आम आदमी , मजदूर , किसान , विद्यार्थी , सब केहू सामिल हो गइल बा। हाँ पर बात इ बा की जे जवने अस्तर पर बा ओही अस्तर पर समाज , देस के लूट रहल बा। भस्टाचार मे...