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पहिली तारीख

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रातिभर दुनु परानी सुति ना पउवींजा। करवट बदलत अउर एन्ने-ओन्ने के बाति करत कब बिहान हो गउए पते ना चलुवे। सबेरे उठते मलिकाइन चाय बना के ले उअवी अउर कहुवी की जल्दी से तइयार होके आफिस चलि जाईं। हम कहुँवी की अरे आफिस त 9 बजे खुली , अबे साते बजे आफिस जाके का करबि। गेटे पर बइठि के माछी मारबि का ? हमार इ बाति सुनि के मलिकाइन कहली की रउरों कुछु बुझाला ना। आरे आजु पहिली तारीख ह नु जी। अबेर क के जाइबि त पता ना तनखाह मिली की ना। हम कहनीं की अबेर से जाईं जाहें सबेर से तनखाह त मिलबे करी। हमरी एतना कहते मलिकाइन खुस हो गइली अउर कहली त तनि आफिस से आजु जल्दिए लवटबि अउर हमरा खातिर एगो झुल्ला ले ले आइबि। महीनन से हमार झुल्ला फाटि गइल बा अउर लइकवो गड़ि उघाड़े घुमता। अउर हाँ आवत साथे दुकानदारे के हिसाब-किताब कइले आइबि। दु महीना से उनकर हिसाब नइखे दिआइल। अबहिन मलिकाइन एतना कहते बारी तवलेकहिं माइयो खाँसत चलि आइल अउर कहलसि की बाबू पइसा बँची त तनि खाँसी के दवाई ले ले अइह S । खाँसत-खाँसत लागता की परान निकलि जाई। नहा-धोके हनुमानजी के अगरबत्ती देखवले की बाद हम आफिस खातिर निकलनी। अबहिन दुआरी की ज्यों बाहर अइन...